Friday, December 12, 2025

जगदंबा जहँ अवतरी सो पुरु बरनि कि जाइ। रिद्धि सिद्धि संपत्ति सुख नित नूतन अधिकाइ॥ नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई॥