Monday, February 23, 2026

नारि सहित मुनि पद सिरु नावा। चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा॥ निज सौभाग्य बहुत गिरि बरना। सुता बोलि मेली मुनि चरना॥४॥ त्रिकालग्य सर्बग्य तुम्ह गति सर्बत्र तुम्हारि॥ कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारि॥