GLORY OF LORD RAMA




Wednesday, April 29, 2026

लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा॥ करि छलु मूढ़ हरी बैदेही। प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही॥ मृग बधि बन्धु सहित हरि आए। आश्रमु देखि नयन जल छाए॥ बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई॥