GLORY OF LORD RAMA




Tuesday, February 24, 2026

अब पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु। गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु


 

अब बिनती मम सुनेहु सिव जौं मो पर निज नेहु। जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु


 

सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना॥ सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें॥ संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना॥


 

प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान। पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान॥ अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू। तौ अस जाइ सिखावन देहू॥ करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटहि कलेसू॥


 

अस कहि परी चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा॥ बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं


 

रबि पावक सुरसरि की नाईं॥ जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान। परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान